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Chapter 1 ठोस अवस्था (The Solid State) Solutions

Question - 31 : -
निम्नलिखित युगलों के पदों (शब्दों) में कैसे विभेद करोगे?

  1. षट्कोणीय निविड संकुलन एवं घनीय निविड संकुलन
  2. क्रिस्टल जालक एवं एकक कोष्ठिका
  3. चतुष्फलकीय रिक्ति एवं अष्टफलकीय रिक्ति।

Answer - 31 : -

1. षट्कोणीय निविड संकुलन एवं घनीय निविड संकुलन
(Hexagonal Close Packing and Cubic Close Packing)
ये दोनों त्रिविमीय निविड संकुलित संरचनाएँ द्विविम-षट्कोणीय निविड संकुलित परतों को एक-दूसरे पर रखकर जनित की जा सकती हैं।
षट्कोणीय निविड संकुलन – जब तृतीय परत को द्वितीय परत पर रखा जाता है, तब उत्पन्न एक सम्भावना के अन्तर्गत द्वितीय परत की चतुष्फलकीय रिक्तियों को तृतीय परत के गोलों द्वारा आच्छादित किया जा सकता है। इस स्थिति में तृतीय परत के गोले प्रथम परत के गोलों के साथ पूर्णत: संरेखित होते हैं। इस प्रकार गोलों का पैटर्न एकान्तर परतों में पुनरावृत्त होता है। इस पैटर्न को प्रायः ABAB….पैटर्न लिखा जाता है। इस संरचना को षट्कोणीय निविड संकुलित (hcp) संरचना कहते हैं (चित्र-1)। इस प्रकार की परमाणुओं की व्यवस्था कई धातुओं; जैसे- मैग्नीशियम और जिंक में पायी जाती है।
घनीय निविड संकुलन – इसके लिए तीसरी परत दूसरी परत के ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि उसके गोले अष्टफलकीय रिक्तियों को आच्छादित करते हों। इस प्रकार से रखने पर तीसरी परत के गोले प्रथम अथवा द्वितीय किसी भी परत के साथ संरेखित नहीं होते। इस व्यवस्था को ‘C’ प्रकार का कहा जाता है। केवल चौथी परत रखने पर उसके गोले प्रथम परत के गोलों के साथ संरेखित होते हैं। जैसा चित्र-1 व 2 में दिखाया गया है। इस प्रकार के पैटर्न को प्रायः ABCABC… लिखा जाता है। इस संरचना को घनीय निविड संकुलित संरचना (ccp) अथवा फलक-केन्द्रित घनीय (fcc) संरचना कहा जाता है। धातु; जैसे- ताँबा तथा चाँदी इस संरचना में क्रिस्टलीकृत होते हैं।
उपर्युक्त दोनों प्रकार के निविड़ संकुलन अति उच्च क्षमता वाले होते हैं और क्रिस्टल का 74% स्थान सम्पूरित रहता है। इन दोनों में प्रत्येक गोला बारह गोलों के सम्पर्क में रहता है। इस प्रकार इन दोनों संरचनाओं में उपसहसंयोजन संख्या 12 है।

2. क्रिस्टल जालक एवं एकक कोष्ठिका
(Crystal Lattice and Unit Cell)
क्रिस्टल जालक – क्रिस्टलीय ठोसों का मुख्य अभिलक्षण अवयवी कणों का नियमित और पुनरावृत्त पैटर्न है। यदि क्रिस्टल में अवयवी कणों की त्रिविमीय व्यवस्था को आरेख के रूप में निरूपित किया जाए, जिसमें प्रत्येक बिन्दु को चित्रित किया गया हो तो व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते हैं। इस प्रकार, “द्विकस्थान (space) में बिन्दुओं की नियमित त्रिविमीय व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते हैं।”
क्रिस्टल जालक के एक भाग को चित्र- 3 में दिखाया गया है। केवल 14 त्रिविमीय जालक सम्भव हैं।
एकक कोष्ठिका – एकक कोष्ठिका क्रिस्टल जालक का लघुतम भाग है (चित्र-3)। जब इसे विभिन्न दिशाओं में पुनरावृत्त किया जाता है तो पूर्ण जालक की उत्पत्ति होती है।

3. चतुष्फलकीय रिक्ति एवं अष्टफलकीय रिक्ति
(Tetrahedral Void and Octahedral Void)
चतुष्फलकीय रिक्ति – ये रिक्तियाँ चार गोलों द्वारा घिरी रहती हैं जो एक नियमित चतुष्फलक के शीर्ष पर स्थित होते हैं। इस प्रकार जब भी द्वितीय परत का एक गोला प्रथम परत की रिक्ति के ऊपर होता है, तब एक चतुष्फलकीय रिक्ति बनती है। इन रिक्तियों को चतुष्फलकीय रिक्तियाँ इसलिए कहा जाता है। क्योंकि जब इन चार गोलों के केन्द्रों को मिलाया जाता है, तब एक चतुष्फलक बनता है। चित्र-4 में इन्हें “T’ से अंकित किया गया है। ऐसी एक रिक्ति को अलग से चित्र-5 में दिखाया गया है।
अष्टफलकीय रिक्ति – ये रिक्तियाँ सम्पर्क में स्थित तीन गोलों द्वारा संलग्नित रहती हैं। इस प्रकार द्वितीय परत की त्रिकोणीय रिक्तियाँ प्रथम परते की त्रिकोणीय रिक्तियों के ऊपर होती हैं और इनकी त्रिकोणीय आकृतियाँ अतिव्यापित नहीं होतीं। उनमें से एक में त्रिकोण का शीर्ष ऊर्ध्वमुखी और दूसरे में अधोमुखी होता है। इन रिक्तियों को चित्र-4 में ‘O’ से अंकित किया गया है। ऐसी रिक्तियाँ छह गोलों से घिरी होती हैं। ऐसी एक रिक्ति को अलग से चित्र- 5 में दिखाया गया है।

Question - 32 : -
निम्नलिखित जालकों में से प्रत्येक की एकक कोष्ठिका में कितने जालक बिन्दु होते हैं?
  1. फलक-केन्द्रित घनीय,
  2. फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय,
  3. अन्तःकेन्द्रित।

Answer - 32 : -

1. फलक-केन्द्रित घनीय संरचना (fcc) में जालक बिन्दु
          = 8 (कोनों पर) + 6 (फलक केन्द्र पर) = 14
2. फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय संरचना में जालक बिन्दु
         = 8 (कोनों पर) + 6 (फलक केन्द्र पर) = 14
3. अन्त:केन्द्रित घनीय (bcc) संरचना में जालक बिन्दु
        = 8 (कोनों पर) + 1 (अन्त:केन्द्र पर) = 9

Question - 33 : -
समझाइए –
  1. धात्विक एवं आयनिक क्रिस्टलों में समानता एवं विभेद का आधार।
  2. आयनिक ठोस कठोर एवं भंगुर होते हैं।

Answer - 33 : -

1. समानताएँ (Similarities) – (1) आयनिक तथा धात्विक दोनों क्रिस्टलों में स्थिर विद्युत आकर्षण बल विद्यमान होता है। आयनिक क्रिस्टलों में यह विपरीत आवेशयुक्त आयनों के मध्य होता है। धातुओं में यह संयोजी इलेक्ट्रॉनों तथा करनैल (kernels) के मध्य होता है। इसी कारण से इन दोनों के गलनांक उच्च होते हैं।
(2) दोनों स्थितियों में बन्ध अदैशिक (non-directional) होता है।
विभेद (Differences) – (1) आयनिक क्रिस्टलों में आयन गति के लिए स्वतन्त्र नहीं होते हैं। अत: ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते। ये ऐसा केवल गलित अवस्था या जलीय विलयन में करते हैं। धातुओं में संयोजी इलेक्ट्रॉन बँधे नहीं होते, अपितु मुक्त रहते हैं। अत: ये ठोस अवस्था में भी विद्युत का चालन करते हैं।
(2) आयनिक बन्ध स्थिर विद्युत आकर्षण के कारण प्रबल होते हैं। धात्विक बन्ध दुर्बल भी हो सकता है। या प्रबल भी, यह संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा करनैल के आकार पर निर्भर करता है।
2. आयनिक क्रिस्टल कठोर होते हैं क्योंकि इनमें विपरीत आवेशयुक्त आयनों के मध्य प्रबल स्थिर विद्युत आकर्षण बल उपस्थित होता है। ये भंगुर होते हैं क्योंकि आयनिक बन्ध अदिशात्मक होता है।

Question - 34 : -
निम्नलिखित के लिए धातु के क्रिस्टल में संकुलन क्षमता की गणना कीजिए।
  1. सरल घनीय,
  2. अन्त:केन्द्रित घनीय,
  3. फलक-केन्द्रित घनीय।
(यह मानते हुए कि परमाणु एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं।)

Answer - 34 : -

1. सरल घनीय जालक में संकुलन क्षमता
(Packing Efficiency in Simple Cubic Lattice)
सरल घनीय जालक में परमाणु केवल घन के कोनों पर उपस्थित होते हैं। घन के किनारों (कोरों) पर कण एक-दूसरे के सम्पर्क में होते हैं (चित्र-6)। इसलिए घन के कोर अथवा भुजा की लम्बाई ‘a’ और प्रत्येक कण का अर्द्धव्यास r निम्नलिखित प्रकार से सम्बन्धित होता है –
a = 2r
घनीय एकक कोष्ठिका का आयतन = a3 =(2r)3 = 8r3
चूँकि सरल घनीय एकक कोष्ठिका में केवल 1 परमाणु होता है।
अतः अध्यासित दिक्स्थान का आयतन = 4/3 πr3
संकुलन क्षमता

2. अन्तः केन्द्रित घनीय जालक में संकुलन क्षमता
(Packing Efficiency in Body-centred Cubic Lattice)
संलग्न चित्र से यह स्पष्ट है कि केन्द्र पर स्थित परमाणु विकर्ण पर व्यवस्थित अन्य दो परमाणुओं के सम्पर्क में है।
Δ EFD
में,
b2 = a2 + a2 = 2a2
b = √2a

अब Δ AFD में,
c2 = a2 + b2 = a2 +2a2 = 3a2
c= √3a
काय विकर्ण 4r की लम्बाई 47 के बराबर है, जहाँ r गोले (परमाणु) का अर्द्धव्यास है क्योंकि विकर्ण पर उपस्थित तीनों गोले एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं। अतः
√3a = 4r
a = 
r
अतः यह भी लिख सकते हैं कि r = a
इस प्रकार की संरचना में परमाणुओं की कुल संख्या 2 है तथा उनका आयतन 2 x (4/3) πr3 है।
3. फलक-केन्द्रित घनीय जालक में संकुलन क्षमता
(Packing Efficiency in Face-centred Cubic Lattice)
संलग्न चित्र से, Δ ABC में,
AC2 = b2 = BC2 + AB2
= a2 + a2 = 2a2
या  b = √2a
यदि गोले का अर्द्धव्यास r हो तो
b= 4r = √2a
या  a = 
= 2√2r
या  r = 
इस प्रकार की संरचना में परमाणुओं की कुल संख्या चार होती है तथा उनका आयतन 4 x πr3 है।

Question - 35 : - चाँदी का क्रिस्टलीकरण fcc जालक में होता है। यदि इसकी कोष्ठिका के कोरों की लम्बाई 4.07 x 10-8 cmतथा घनत्व 10.5 g cm-3 हो तो चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।

Answer - 35 : - fcc जालक के लिए Z = 4
कोर की लम्बाई, a = 4.077 x 10-8 cm,घनत्व ρ = 10.5 g cm-3

=107.14 g mol-1
अतः चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान = 107.14 g mol-1 होगा।

Question - 36 : - एक घनीय ठोस दो तत्वों P एवं Q से बना है। घन के कोनों पर Q परमाणु एवं अन्तःकेन्द्र पर P परमाणु स्थित हैं। इस यौगिक का सूत्र क्या है? P एवं Q की उपसहसंयोजन संख्या क्या है?

Answer - 36 : -

घन में परमाणु Q, 8 कोनों पर स्थित हैं।
Q परमाणुओं की संख्या = 1/8 x 8= 1
परमाणु P अन्त: केन्द्र पर स्थित है,
अतः P परमाणुओं की संख्या = 1
अतः यौगिक का सूत्र = PQ
P तथा Q की उप-सहसंयोजन संख्या = 8

Question - 37 : - नायोबियम का क्रिस्टलीकरण अन्तःकेन्द्रित घनीय संरचना में होता है। यदि इसका घनत्व 8.55 g cm-3 हो तो इसके परमाण्विक द्रव्यमान 93u का प्रयोग करके परमाणु त्रिज्या की गणना कीजिए।

Answer - 37 : -

अन्त: केन्द्रित घनीय संरचना (bcc) में Z = 2, घनत्व ρ = 8.55 g cm-3, परमाण्विक द्रव्यमान,
M = 92.9 g mol-1
a = (36.1 x 10-24 cm3)1/3 =3.3 x 10-8 cm
bcc
एकक कोष्ठिका के लिए,
विकर्ण = 4 x नायोबियम परमाणु की त्रिज्या
√3a = 4 x
नायोबियम परमाणु की त्रिज्या

= 1.43 x 10-8 cm

Question - 38 : - यदि अष्टफलकीय रिक्ति की त्रिज्या हो तथा निविड संकुलन में परमाणुओं की त्रिज्या हो तो r एवं R में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।

Answer - 38 : - अष्टफलकीय रिक्ति में स्थित गोला चित्र 9 में छायांकित वृत्त द्वारा प्रदर्शित है। रिक्ति के ऊपर तथा नीचे उपस्थित गोले चित्र-9 में प्रदर्शित नहीं हैं। अब चूंकि ABC एक समकोण त्रिभुज है, अत: पाइथागोरस सिद्धान्त लागू करने पर,
AC2 = AB2 + BC2
(2R)2 = (R + r)2 + (R + r)2
= 2(R + r)2
4R2 = 2(R + r)2
(√2R)2 = (R + r)2
√2R = R + r
r = √2R – R
r = (√2 – 1)R
r = (1.414 – 1)R
r = 0.414 R

Question - 39 : - कॉपरfcc जालक के रूप में क्रिस्टलीकृत होता है जिसके कोर की लम्बाई 3.61 x 10-8 cmहै। यह दर्शाइए कि गणना किए गए घनत्व के मान तथा मापे गए घनत्व 8.92 g cm-3 में समानता है।

Answer - 39 : - fcc जालक में Z = 4, कोर की लम्बाई, a = 3.61 x 10-8 cm,घनत्व ρ = ?
कॉपर का परमाण्विक द्रव्यमान, M = 63.5 g mol-1

= 8.97 g cm-3
अतः घनत्व का गणनात्मक मान 8.97 g cm-3 तथा मापे गये घनत्व का मान 8.92 g cm-3 लगभग समान हैं।

Question - 40 : - विश्लेषण द्वारा ज्ञात हुआ कि निकिल ऑक्साइड का सूत्र Ni0.98 O1.00 है। निकिल आयनों का कितना अंश Ni2+ और Ni3+ के रूप में विद्यमान है?

Answer - 40 : -

Ni0.98 O1.00 नॉन- स्टॉइकियोमीटी यौगिक है। Ni आयन तथा ऑक्साइड आयनों का संघटन 98 : 100 है। माना Ni में x Ni2+ आयन तथा (98 – x) Ni3+ आयन हैं।
Ni2+ 
तथा Ni3+ पर उपस्थित धनावेश ऑक्साइड आयनों पर उपस्थित ऋणावेश के बराबर होगा, अतः
x × 2 + (98 – x )3 = 100 x 2
2 + 294 – 3x = 100 × 2
x = 94
अत: 98 Ni आयनों में 94 Ni2+ आयन तथा 4 Ni3+ आयन होंगे।
Ni2+ आयनों का प्रतिशतx 100=96%

Ni3+ आयनों का प्रतिशत = 4%

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