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Chapter 5 पृष्ठ रसायन (Surface Chemistry) Solutions

Question - 1 : - रसोवशोषण के दो अभिलक्षण दीजिए।

Answer - 1 : -

  1. रसोवशोषण अतिविशिष्ट होता है।
  2. रसोवशोषण में यौगिक बनने के कारण इसकी प्रकृति अनुत्क्रमणीय होती है।

Question - 2 : - ताप बढ़ने पर भौतिक अधिशोषण क्यों घटता है ?

Answer - 2 : -

भौतिक अधिशोषण ऊष्माक्षेपी (exothermic) होता है।
 
जब ताप बढ़ाया जाता है तब साम्य पश्च दिशा में विस्थापित हो जाता है जिससे कि बढ़े हुए ताप को उदासीन किया जा सके। अतः अधिशोषक से गैस बाहर निकल जाती है।

Question - 3 : - अपने क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में चूर्णित पदार्थ अधिक प्रभावी अधिशोषक क्यों होते हैं?

Answer - 3 : - क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में चूर्णित पदार्थ का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होता है। पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक होने पर अधिशोषण अधिक होता है।

Question - 4 : - हैबर प्रक्रम में हाइड्रोजन को NiO उत्प्रेरक की उपस्थिति में मेथेन के साथ भाप की अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है। प्रक्रम को भाप पुनः संभावन कहते हैं। अमोनिया प्राप्त करने के हैबर प्रक्रम में CO को हटाना क्यों आवश्यक है?

Answer - 4 : - CO इस प्रक्रम में उत्प्रेरक विष का कार्य करती है, अत: इसे हटाना अनिवार्य होता है।

Question - 5 : - हैबर प्रक्रम में हाइड्रोजन को NiO उत्प्रेरक की उपस्थिति में मेथेन के साथ भाप की अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है। प्रक्रम को भाप पुनः संभावन कहते हैं। अमोनिया प्राप्त करने के हैबर प्रक्रम में CO को हटाना क्यों आवश्यक है?

Answer - 5 : - CO इस प्रक्रम में उत्प्रेरक विष का कार्य करती है, अत: इसे हटाना अनिवार्य होता है।

Question - 6 : - हैबर प्रक्रम में हाइड्रोजन को NiO उत्प्रेरक की उपस्थिति में मेथेन के साथ भाप की अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है। प्रक्रम को भाप पुनः संभावन कहते हैं। अमोनिया प्राप्त करने के हैबर प्रक्रम में CO को हटाना क्यों आवश्यक है?

Answer - 6 : - CO इस प्रक्रम में उत्प्रेरक विष का कार्य करती है, अत: इसे हटाना अनिवार्य होता है।

Question - 7 : - एस्टर का जल-अपघटन प्रारम्भ में धीमा एवं कुछ समय पश्चात् तीव्र क्यों हो जाता है?

Answer - 7 : -

एस्टर का जल-अपघटन निम्न समीकरण के अनुसार होता है –
 
अभिक्रिया में निर्मित अम्ल स्वउत्प्रेरक (autocatalyst) का कार्य करता है। अत: कुछ समय पश्चात् अभिक्रिया तीव्र हो जाती है।

Question - 8 : - उत्प्रेरण के प्रक्रम में विशोषण की क्या भूमिका है ?

Answer - 8 : - विशोषण ठोस उत्प्रेरक की सतह को उस पर अभिकारकों के पुन: अधिशोषण के लिए मुक्त रखता है।

Question - 9 : - आप हार्डीशुल्जे नियम में संशोधन के लिए क्या सुझाव दे सकते हैं?

Answer - 9 : -

हार्डी- शुल्जे नियम के अनुसार, आयन जिन पर कोलॉइडी कणों के विपरीत आवेश होता है । कोलॉइडी कणों को उदासीन करके उनका स्कन्दन करते हैं लेकिन वास्तव में इन आयनों युक्त सॉल को भी स्कन्दन होता है। चूंकि कण इनके आवेश को उदासीन कर देते हैं। इन परिस्थितियों में हार्डी-शुल्जे नियम को निम्नवत् रूपान्तरित किया जा सकता है –
जब दो विपरीत आवेशित सॉल की उपयुक्त मात्राओं को मिश्रित किया जाता है तब वे आवेशों को उदासीन करके अवक्षेपित हो जाते हैं।

Question - 10 : - अवक्षेप का मात्रात्मक आकलन करने से पूर्व उसे जल से धोना आवश्यक क्यों है?

Answer - 10 : - अवक्षेप बनाने के लिए मिश्रित विद्युत-अपघट्यों की कुछ मात्रा अवक्षेप के कणों की सतह पर अधिशोषित बनी रहती है, अतः अवक्षेप का मात्रात्मक आकलन करने से पूर्व उसे जल से धोना आवश्यक होता है।

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