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Chapter 3 वैद्युत रसायन (Electro Chemistry) Solutions

Question - 31 : - ZnSO4, AgNO3 एवं CuSO4 विलयन वाले तीन विद्युत-अपघटनी सेलों A, B, C को श्रेणीबद्ध किया गया एवं 1.5 ऐम्पियर की विद्युत धारा, सेल B के कैथोड पर 145 सिल्वर निक्षेपित होने तक लगातार प्रवाहित की गई। विद्युत धारो कितने समय तक प्रवाहित हुई? निक्षेपित कॉपर एवं जिंक को द्रव्यमान क्या होगा ?

Answer - 31 : -


Question - 32 : - तालिका3.1 (पाठ्यपुस्तक) में दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या निम्नलिखित अभिकर्मकों के बीच अभिक्रिया सम्भव है?
(i) Fe3+ (aq) 
और I– (aq)
(ii) Ag+ (aq) 
और Cu (s)
(iii) Fe3+ (aq) 
और Br– (aq)
(iv) Ag (s) 
और Fe3+ (aq)
(v) Br2(aq)
और Fe2+ (aq).

Answer - 32 : -


Question - 33 : -

निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए विद्युत-अपघटन से प्राप्त उत्पाद बताइए –

  1. सिल्वर इलेक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
  2. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
  3. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ H2SO4 का तनु विलयन
  4. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ CuCl2 का जलीय विलयन।

Answer - 33 : - 1. AgNO3 (aq)→ Ag+ (aq) + NO–3 (aq)
H2O H+ +OH–
कैथोड पर : चूंकि सिल्वर का अपचयन विभव (+0.80 V) जल (-0.830 V) से अधिक है, इसलिए Ag+ वरीयता के

आधार पर अपचयित होगा तथा सिल्वर धातु कैथोड पर जमा होगी।
Ag+ (aq) + e– → Ag (s)
ऐनोड पर : निम्न अभिक्रिया होगी –
H2O (l) → 1/2 O2(g) + 2H+ (aq)
NO–3 (aq) → NO3 + e–
Ag(s) → Ag+ (aq) + e–

इन अभिक्रियाओं में कॉपर का अपचयन विभव न्यूनतम है। इसलिए सिल्वर स्वयं ऐनोड पर ऑक्सीकरण के फलस्वरूप Ag’ में परिवर्तित हो जायेगी और Ag’ आयन विलयन में चले जायेंगे।
Ag(s) → Ag+ (aq) + e–

2. कैथोड पर : सिल्वर आयने अपचयित होंगे तथा सिल्वर धातु जमा होगी।
ऐनोड पर : चूँकि जल का अपचयन विभव NO–3 आयनों से कम होता है, इसलिए जल वरीयता के आधार पर ऑक्सीकृत होगा तथा ऑक्सीजन मुक्त होगी।
H2O (l) → 1/2 O2 (g) + 2H+ (aq) + 2e–

3. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ H2SO4 के तनु विलयन का विद्युत-अपघटन
H2SO4(aq) → 2H+ (aq) + SO2-4 (aq)
H2O 
H+ +OH–
कैथोड पर : H+ +e– →H
H → H2 (g)
ऐनोड पर : OH– →OH + e–
4OH → 2H2O (l) + O2 (g)
अत: कैथोड पर H, तथा ऐनोड पर 0 मुक्त होगी।

4. CuCl2 (aq) → Cu2+ (aq)+ 2Cl– (aq)
H2O 
H+ +OH–

कैथोड पर : चूंकि Cu2+ (+0.341 V) का अपचयन विभव जल (-0.83 V) से अधिक होता है, इसलिए Cu2+ वरीयता के आधार पर अपचयित होंगे तथा कैथोड पर कॉपर धातु जमा होगी।
Cu2+ (aq) + 2e– → Cu (s)

ऐनोड पर : निम्न अभिक्रियाओं के होने की सम्भावना है –
H2O (l) → 1/2 O2 (g) + 2H+ (aq) + 2e– ;
E° = +1.23 V
2Cl–  (aq) → Cl2 (g) + 2e–  ;E° = + 1.36V
चूँकि जल का अपचयन विभव Cl– (जलीय) आयनों से कम होता है, इसलिए जल वरीयता के आधार पर ऐनोड पर ऑक्सीकृत होगा तथा O2, गैस मुक्त होगी।

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