Question -
Answer -
(क)
वातावरण की ऑक्सीजनयुक्त वायु को नाक से फेफड़ों तक पहुँचाने और फेफड़ों की कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वायु को नाक द्वारा शरीर से बाहर निकालने की पूरी प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं।
(ख)
वातावरण की ऑक्सीजनयुक्त वायु को नाक से फेफड़ों तक पहुँचाने की क्रिया अंत:श्वसन या श्वसन कहलाती है। इसके विपरीत फेफड़ों की कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वायु को नाक द्वारा शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को उच्छवसन या नि:श्वसन कहते हैं। अंत:श्वसन एवं उच्छवसन की क्रिया संयुक्त रूप से श्वासोच्छवास कहलाती है।
(ग)
श्वासोच्छवास में अंत:श्वसन एवं उच्छवसन की सम्मिलित क्रिया होती है। जिसमें ऑक्सीजन को नाक से फेफड़ों तक पहुँचाया जाता है और फेफड़ों की कार्बन डाइऑक्साइड को नाक द्वारा बाहर निकाला जाता है। यह प्रक्रिया श्वसन क्रिया का अंगमात्र है। श्वसन क्रिया में अंतः श्वसन द्वारा ली गई ऑक्सीजन रक्त के माध्यम से प्रत्येक जीवित कोशिका में पहुँचकर उसमें उपस्थित भोज्य पदार्थ को विखंडित करती है। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा बनने के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं जो नि:श्वसन द्वारा शरीर से बाहर निकलती है। यह संपूर्ण प्रक्रिया ही श्वसन है।
(घ)
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
(ङ)
पौधों की पत्तियों में सूक्ष्म छिद्र होते है, जिन्हें रंध्र कहते हैं। रंध्रों से ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैसों का आदान-प्रदान होता है।