Question -
Answer -
मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र-भौगोलिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में मानव के उद्यम द्वारा निर्मित सांस्कृतिक दृश्यभूमि का अध्ययन ही मानव भूगोल की विषय-वस्तु है। मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है। इसमें वे सभी पदार्थ, कर्म और विचार शामिल किए जाते हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्य व उसके पर्यावरण से जुड़े होते हैं।
हंटिंगटन द्वारा प्रतिपादित मानव भूगोल का क्षेत्र .
अमेरिकी भूगोलवेत्ता हंटिंगटन द्वारा प्रतिपादित मानव भूगोल का क्षेत्र सर्वाधिक विस्तृत एवं मान्य है। उन्होंने मानव भूगोल के तथ्यों को एक तालिका बनाकर तीन प्रमुख श्रेणियों में विभक्त किया है-
- भौतिक दशाएँ
- जीवन के रूप और
- मानव अनुक्रियाएँ (तालिका)।
ये तीनों प्रकार के तथ्य आपस में जुड़े हुए हैं। हंटिंगटन ने सर्वप्रथम यह बताया कि भौतिक दशाओं का सामूहिक प्रभाव जीवन के विभिन्न रूपों (पौधे, जन्तु और मानव) पर होता है। जीवन के ये रूप भी आपस में अन्तर्सम्बन्धी हैं। भौतिक दशाओं, पौधों और जन्तुओं से मानव की क्रिया-प्रतिक्रिया होती है जिसके परिणामस्वरूप मानव की अनुक्रियाएँ (Responses) उत्पन्न होती हैं।
तालिकाः एल्सवर्थ हंटिंगटन के अनुसार मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र
नोट – तीर तथा उनके विस्तार, उन तरीकों का संकेत करते हैं, जिनमें भौतिक दशाएँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए जलवायु, पृथ्वी की गोल आकृति, धरातल के लक्षणों तथा महासागर जैसे जलाशयों से प्रभावित होती है। बदले में यह धरातल के लक्षणों, मिट्टी की गुणवत्ता और खनिज निक्षेपों के स्वरूप को प्रभावित करती है। यह जलाशयों को भी प्रभावित करती है …….. लेकिन स्पष्टता की दृष्टि से कुछ को ‘छोड़ दिया गया है।