Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) Solutions
Question - 11 : - पृथ्वी से किसी रॉकेट को सूर्य की ओर दागा गया है। पृथ्वी के केन्द्र से किस दूरी पर रॉकेट | पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है? सूर्य का द्रव्यमान = 2×1030 kg, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6×1024 kg| अन्य ग्रहों आदि के प्रभावों की उपेक्षा कीजिए (कक्षीय त्रिज्या = 1.5×1011 m)।
Answer - 11 : - माना पृथ्वी के केन्द्र से x मीटर की दूरी पर रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है। इस क्षण रॉकेट की सूर्य से दूरी = (r – x) मीटर
जहाँ r = सूर्य तथा पृथ्वी के बीच की दूरी अर्थात् पृथ्वी की कक्षीय त्रिज्या = 1.5×1011 मीटर यह तब भी सम्भव है जबकि –
पृथ्वी द्वारा रॉकेट पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल = सूर्य द्वारा रॉकेट पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल

Question - 12 : - आप सूर्य को कैसे तोलेंगे, अर्थात् उसके द्रव्यमान का आकलन कैसे करेंगे? सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या 1.5×108 km है।।
Answer - 12 : -
पृथ्वी के परित: उपग्रह के परिक्रमण काल के सूत्र [latex s=2]T=2\pi \sqrt { \frac { { r }^{ 3 } }{ { GM }_{ e } } } [/latex] , के अनुरूप सूर्य के परितः पृथ्वी का परिक्रमण काल
[latex s=2]T=2\pi \sqrt { \frac { { r }^{ 3 } }{ { GM }_{ e } } } [/latex] (जहाँ M, = सूर्य का द्रव्यमान)
Question - 13 : - एक शनि-वर्ष एक पृथ्वी-वर्ष का 29.5 गुना है। यदि पृथ्वी सूर्य से 1.5×108 km दूरी पर है, तो शनि सूर्य से कितनी दूरी पर है?
Answer - 13 : - पृथ्वी की सूर्य से दूरी RSE =1.5×108 km
माना पृथ्वी का परिक्रमण काल =TE
तब शनि का परिक्रमण काल TS =29.5TE
शनि की सूर्य से दूरी RSS =?
परिक्रमण कालों के नियम से,

Question - 14 : - पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 63N है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर पृथ्वी के कारण इस वस्तु पर गुरुत्वीय बल कितना है?
Answer - 14 : -
यदि पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण g हो, तो पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण
[latex s=2]{ g }^{ I }=g{ \left( 1+\frac { h }{ { R }_{ e } } \right) }^{ 2 }[/latex]
यदि वस्तु का द्रव्यमान m हो तो दोनों पक्षों में m से गुणा करने पर,
[latex s=2]m{ g }^{ I }=\frac { mg }{ { \left( 1+\frac { h }{ { R }_{ e } }\right) }^{ 2 } } [/latex] (जहाँ Re = पृथ्वी की त्रिज्या)
यहाँ mg = पृथ्वी के पृष्ठ पर वस्तु का भार = 63 न्यूटन
mg’ = पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर वस्तु का भार अर्थात् पृथ्वी के कारण वस्तु पर गुरुत्वीय बल Fg तथा h = Re/2

Question - 15 : - यह मानते हुए कि पृथ्वी एकसमान घनत्व का एक गोला है तथा इसके पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 250 N है, यह ज्ञात कीजिए कि पृथ्वी के केन्द्र की ओर आधी दूरी पर इस वस्तु का भार क्या होगा?
Answer - 15 : -
पृथ्वी तल से h गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण
[latex s=2]{ g }^{ I }=g\left( 1-\frac { h }{ { R }_{ e } } \right) [/latex] (जहाँ Re = पृथ्वी की त्रिज्या)
अथवा [latex s=2]m{ g }^{ I }=mg\left( 1-\frac { h }{ { R }_{ e } } \right) [/latex]
यहाँ पृथ्वी के पृष्ठ पर वस्तु का भार mg = 250 N
h = Re/2(जहाँ Re = पृथ्वी की त्रिज्या)
mg’ = इस गहराई पर वस्तु का भार w’
[latex s=2]\therefore { W }^{ I }=250N\left( 1-\frac { \frac { { R }_{ e } }{ 2 } }{ { R }_{ e } } \right) =\left( 250\times \frac { 1 }{ 2 } \right) N[/latex]
= 125 N
Question - 16 : - पृथ्वी के पृष्ठ से ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर कोई रॉकेट 5 km s-1 की चाल से दागा जाता है। पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट पृथ्वी से कितनी दूरी तक जाएगा? पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0×1024 kg; पृथ्वी की माध्य त्रिज्या = 6.4×106 m तथा G = 6.67×10-11N-m2/kg-2.
Answer - 16 : -
माना रॉकेट का द्रव्यमान = m; पृथ्वी से ऊर्ध्वाधरत: ऊपर की ओर रॉकेट का प्रक्षेप्य वेग ν = 5 किमी-से-1 = 5×10³ मी-से-1
माना रॉकेट पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व पृथ्वी से अधिकतम दूरी H ऊँचाई तक जाता है। अत: इस ऊँचाई पर रॉकेट का वेग शून्य हो जाता है।
ऊर्जा संरक्षण सिद्धान्त से पृथ्वी तल से महत्तम ऊँचाई पर
पहुँचने पररॉकेट की गतिज ऊर्जा में कमी = उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि –
Question - 17 : - पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी प्रक्षेप्य की पलायन चाल 11.2 kms-1 है। किसी वस्तु को इस चाल की तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वी से अत्यधिक दूर जाने पर इस वस्तु की चाल क्या होगी? सूर्य तथा अन्य ग्रहों की उपस्थिति की उपेक्षा कीजिए।
Answer - 17 : - पृथ्वी के पृष्ठ पर पलायन चाल[latex s=2]{ \nu }_{ e }=\sqrt { \left( \frac { 2G{ M }_{ e } }{ { R }_{ e } }\right) } …(1) [/latex]
यहाँ पृथ्वी के पृष्ठ पर वस्तु का प्रक्षेप्य वेग )ν = 3νe;
माना पृथ्वी से अत्यधिक दूर (अनन्त पर) चाल =νf
ऊर्जा संरक्षण के सिद्धान्त से, पृथ्वी तल पर कुल ऊर्जा = अनन्त पर कुल ऊर्जा
अर्थात् पृथ्वी तल पर (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) =अनन्त पर (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा)

Question - 18 : - कोई उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से 400 km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इस उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने में कितनी ऊर्जा खर्च होगी? उपग्रह का द्रव्यमान = 200 kg; पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0×1024 kg; पृथ्वी की त्रिज्या = 6.4×106 m तथा G = 6.67×10-11 N m2 kg-2.
Answer - 18 : - पृथ्वी के परितः उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या r= Re +h
r = 6.4×106 मीटर +400×103 मीटर
= 68×105 मीटर =6.8×106
मीटर अतः इस कक्षा में घूमते हुए उपग्रह की कुल ऊर्जा
[latex s=2]E=-\left( \frac { { GM }_{ e }m }{ 2r } \right) [/latex]
(जहाँ m= उपग्रह का द्रव्यमान, Me =पृथ्वी का द्रव्यमान)
पृथ्वी के.गुरुत्वीय प्रभाव से उपग्रह को बाहर निकालने के लिए इसको दी जाने वाली आवश्यक ऊर्जा

Question - 19 : - दो तारे, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान (2×1030 kg) के बराबर है, एक-दूसरे की ओर सम्मुख टक्कर के लिए आ रहे हैं। जब वे 109 km दूरी पर हैं तब इनकी चाल उपेक्षणीय है। ये तारे किस चाल से टकराएँगे? प्रत्येक तारे की त्रिज्या 104 km है। यह मानिए कि टकराने के पूर्व तक तारों में कोई विरूपण नहीं होता (G के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए)।
Answer - 19 : - दिया है, प्रत्येक तारे को द्रव्यमान (माना) M= 2×1030 किग्रा तथा तारों के बीच प्रारम्भिक दूरी (माना) r1 =109 किमी =1012 मी।
तारों की प्रारम्भिक कुल ऊर्जा Ei =प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा + प्रारम्भिक स्थितिज ऊर्जा
[latex s=2]=0+\left[ -\frac { GMM }{ { r }_{ 1 } } \right] =-\left[ \frac { {GM }^{ 2 } }{ { r }_{ 1 } } \right] [/latex]
जब दोनों तारे परस्पर टकराते हैं, तो उनके बीच की दूरी r2 =2×x तारे की त्रिज्या =2R यदि तारों का ठीक टकराने से पूर्व वेग ν हो अर्थात् वे ν चाल से टकराते हैं, तो तारों की कुल अन्तिम ऊर्जा Ef =अन्तिम गतिज ऊर्जा + अन्तिम स्थितिज ऊर्जा