Question -
Answer -
जल एक चक्र के रूप में महासागर से धरातल पर और धरातल से महासागर तक चलने वाली पक्रिया है। यह चक्र पृथ्वी पर, पृथ्वी के नीचे तथा ऊपर वायुमण्डल में जल के संचलन की व्यवस्था करता है। पृथ्वी पर जलचक्र करोड़ों वर्षों से कार्यरत है और आगे भी पृथ्वी पर जब तक जीवन है, यह चक्र सक्रिय रहेगा। सभी प्रकार के जीव इसी जलचक्र पर निर्भर हैं। जलचक्र से सम्बन्धित तत्त्व, जो परस्पर अन्तर-सम्बन्धित पक्रिया में जलचक्र को सक्रिय रखते हैं, निम्नलिखित हैं-
1. वाष्पीकरण-वाष्पीकरण जलचक्र का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है। महासागर से वायुमण्डल का परिसंचलन इसी प्रक्रिया द्वारा सम्पन्न होता है। इस प्रक्रिया में सौर ताप से जल गर्म होकर वाष्प के रूप में वायुमण्डल में जाता है।
2. संघनन-जल के गैसीय अवस्था से द्रवीय अवस्था में परिवर्तन को संघनन कहते हैं। जलचक्र में संघनन का कार्य वायुमण्डल में सम्पन्न होता है। इसी प्रक्रिया में महासागर का जल वायुमण्डल से धरातल पर पहुँचता है।
3. अवक्षेपण-इस प्रक्रिया में वायुमण्डले की जलवाष्प जल-बूंदों में जलवृष्टि के रूप में पृथ्वी पर आती है।
इस प्रकार वाष्पीकरण, संघनन एवं अवक्षेपण तत्त्वों द्वारा जलचक्र की प्रक्रिया सतत् चलती रहती है। (चित्र 13.1)।