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Question -

पुष्पित पौधों के जीवन में किसी एक प्राचालिक (parameter) से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता है, क्यों?



Answer -

वृद्धि के प्राचालिक
वृद्धि सभी जीवधारियों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है। पौधों में वृद्धि कोशिका विभाजन, कोशिका विवर्धन या दीर्धीकरण तथा कोशिका विभेदन के फलस्वरूप होती है। पौधे की मेरिस्टेम कोशिकाओं (meristematic cells) में कोशा विभाजन की क्षमता पाई जाती है। सामान्यतया कोशिका विभाजन जड़ तथा तने के शीर्ष (apex) पर होता है। इसके फलस्वरूप जड़ तथा तने की लम्बाई में वृद्धि होती है। एधा (cambium) तथा कॉर्क एधा (8rk cambium) के कारण तने और जड़ की मोटाई में वृद्धि होती है। इसे द्वितीयक वृद्धि (secondary growth) कहते हैं। कोशिकीय स्तर पर वृद्धि मुख्यतः जीवद्रव्य मात्रा में वर्धन का परिणाम है। जीवद्रव्य की बढ़ोतरी या वर्धन का मापन कठिन है। वृद्धि दर मापन के कुछ मापदण्ड हैं–ताजे भोर में वृद्धि, शुष्क भार में वृद्धि, लम्बाई, क्षेत्रफल, आयतन तथा कोशिका संख्या में वृद्धि आदि। मक्का की जड़ को अग्रस्थ मेरिस्टेम प्रति घण्टे लगभग 17,500 कोशिकाओं का निर्माण करता है। तरबूज की कोशिका के आकार में लगभग 3,50,000 गुना वृद्धि हो सकती है। पराग नलिका की लम्बाई में वृद्धि होने से यह वर्तिकाग्र, वर्तिका से होती हुई अण्डाशय में स्थित बीजाण्ड में प्रवेश करती है।

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