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Question -

सापेक्ष और निरपेक्ष निर्धनता में क्या अंतर है?



Answer -

सापेक्ष निर्धनता– सापेक्ष निर्धनता से अभिप्राय विभिन्न वर्गों, प्रदेशों या दूसरे देशों की तुलना में पायी जाने वाली निर्धनता से है। जिस देश या वर्ग के लोगों का जीवन निर्वाह स्तर निम्न होता है वे उच्च निर्वाह स्तर के लोगों या देशों की तुलना में गरीब या सापेक्ष रूप से निर्धन माने जाते हैं।

निरपेक्ष निर्धनता- निरपेक्ष निर्धनता से अभिप्राय किसी देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से है। भारत में निरपेक्ष निर्धनता का अनुमान लगाने के लिए निर्धनता रेखा की धारणा का प्रयोग किया जाता है। निर्धनता रेखा वह है जो उस प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय को प्रकट करती है जिसके द्वारा लोग अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं को संतुष्ट कर सकते हैं। भारत की कीमतों के आधार पर ३ 328 ग्रामीण क्षेत्र में तथा १ 454 शहरी क्षेत्र में प्रति मास उपभोग को निर्धनता रेखा माना गया है। जिन लोगों का प्रति माह उपभोग व्यय इससे कम है उन्हें निर्धन माना जाता है। कैलोरी की दृष्टि से निर्धनता रेखा की सीमा ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी है।

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