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Question -

यह निबंध भावों की गंभीरता को समुच्चय जान पड़ता है। प्रस्तुत पाठ के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।



Answer -

विचारों के साथ ही भावों की प्रधानता भी इस निबंध में मिलती है। भाव तत्व निबंध का प्रमुख तत्व है। इसी तत्व के आधार पर निबंधकार मूल भावना या चेतना प्रस्तुत कर सकता है। वातावरण का पूर्ण ज्ञान उन्हें था। कवि न होने के बावजूद भी प्रकृति को चित्रण भावात्मक ढंग से करते थे। प्रकृति के प्रत्येक परिवर्तन का उन पर गहरा प्रभाव होता था। वे भावुक थे इसलिए प्रकृति में होने वाले नित प्रति परिवर्तनों से वे भावुक हो जाते थे। इस बात को स्वीकारते हुए वे लिखते हैं –
 
“यद्यपि कवियों की भाँति हर फूल पत्ते को देखकर मुग्ध होने लायक हृदय विधाता ने नहीं दिया है, पर नितांत ढूँठ भी नहीं हैं। शिरीष के पुष्प मेरे मानस में थोडा हिल्लोल ज़रूर पैदा करते हैं।” निबंधकार का मानना है कि व्यक्तियों की तरह शिरीष का पेड़ भी भावुक होता है। उसमें भी संवेदनाएँ और भावनाएँ भरी होती हैं – “एक-एक बार मुझे मालूम होता है। कि यह शिरीष एक अद्भुत अवधूत हैं। दुख हो या सुख वह हार नहीं मानता न ऊधो को लेना न माधो का देना। जब धरती और आसमान जलते रहते हैं तब भी यह हज़रत न जाने कहाँ से अपना रस खींचते रहते हैं। मौज में आठों याम मस्त रहते हैं।” अतः निबंधकार ने इस निबंध में भावात्मकता का गुण भरा है।

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