Question -
Answer -
द्विवेदी जी की गणना एक ओर जहाँ उच्चकोटि के निबंधकारों में की जाती है, वहीं उन्हें भाषा सुधारक भी माना जाता है। उन्होंने अपने अथक प्रयास से हिंदी को परिष्कृत करते हुए सुंदर रूप प्रदान किया। उनकी भाषागत विशेषता में प्रमुख है-संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का प्रयोग। उनकी रचना में आम बोलचाल के शब्दों के अलावा उर्दू के शब्द भी हैं। उनके लंबे वाक्य भाषा में कहीं भी बोझिलता नहीं आने देते हैं। उनकी भाषा भावों की अभिव्यक्ति में पूरी तरह सफल हुई है। मुहावरों के प्रयोग से भाषा सजीव हो उठी है। उनकी व्यंग्यात्मक शैली इतनी प्रभावशाली है कि पाठकों के अंतर्मन को छू जाती है।